आर्मेचर कोटिंग स्वचालन

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Dhatukarya - Udyam Prakashan    04-मार्च-2019   
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armature coating automation
 
 
बदलते जमाने के साथ स्वचालन का महत्व बढ़ता जा रहा है। बेहतर तकनीक के साथ कार्यपद्धति एवं प्रक्रिया में बदलाव, पूंजीनिवेश और प्रशिक्षा इन बातों पर सोचना जरूरी बन गया है। छोटे कारखानों में भी, कारीगरों की मदत ले कर, मौजूदा माहौल और स्थिति में स्वचालन आजमाया जा रहा है। इसी सोच से प्रेरित होकर हमने अपनी कंपनी में स्वचालन के प्रयोग आरंभ किए। उसमें से एक है आर्मेचर कोटिंग स्वचालन। यह किसी दुपहिया वाहन उद्योग के लिए बनाया गया है।
 
आर्मेचर कोटिंग स्वचालन
 
दुपहिया वाहन के लिए आर्मेचर बनाने वाली कंपनी के लिए यह स्वचालन बनाया गया है। पहले यह काम कारखाने के कारीगर हाथों से करते थे, इसलिए उसे बहुत सारा वक्त लगता था। उस पद्धती में एकसमान गुणवत्ता प्राप्त नहीं हो सकती थी तथा कोटिंग मटीरीयल की खपत सीमा से बाहर कम जादा होती थी। इसलिए इसमें सुधार लाना जरूरी बन गया था। इन सभी कठिनाइयों पर सोचने के बाद हमने कोटिंग की प्रक्रिया स्वचालित बनाने का फैसला किया।
 
कोटिंग की प्रक्रिया का अध्ययन करने के बाद ध्यान आया की आर्मेचर एक विशेष तरीके में ही घुमाया जाना चाहिए। घूमते वक्त उसके फेरे एकसमान होने चाहिए। साथ ही कोटिंग मटीरीयल का उस पर गिरना (डिस्पेंसिंग) एक निश्चित स्थान से शुरू हो कर निश्चित स्थान पर ही रुकना चाहिए, जिसके जरिए पूरे जरूरी क्षेत्र पर कोटिंग हो सके। पुरानी पद्धति में हाथों से कोटिंग करते समय, कर्मचारी चम्मच जैसा एक टूल घुमा कर उसे समतल बनाता था। यह करते वक्त उसमें अक्सर खराबी आती थी। स्वचालन में इसे टालने पर सोचा गया। हमने तय किया कि इसे टालने के लिए हम जितनी पतली परत रखेंगे उतना अच्छा होगा। इस मामले में यह भी पक्का किया गया कि सबसे कम व्यास की नोजल का इस्तेमाल करना बेहतर होगा।
armature coating automation
 
आर्मेचर के अलग अलग आकार के 3-4 किस्म थे। इसलिए ये सभी किस्म एक ही मशीन पर बिठाना एक बड़ी चुनौती थी। इन सभी प्रकार के आर्मेचर के ड्राइंग प्राप्त कर के हमने उनका अध्ययन किया और एक फिक्श्चर का डिजाइन बनाया जो सभी प्रकारों के लिए अनुकूल था। इसकी वजह से एक ही मशीन पर, सिर्फ एक पुर्जा बदली कर के, हम चार अलग अलग किस्मों के आर्मेचरों का संचलन कर पाएँ। अगली चुनौती थी कोटिंग मटीरीयल की आपूर्ती करने वाली (डिस्पेंसिंग) सिस्टम। यह हमने लॉकटाईट कंपनी से प्राप्त की। उसमें बहुत कम व्यास के नोजल का प्रयोग कर के, एक पतले धागे जैसा, कोटिंग हासिल करने में हमें कामयाबी मिली। जिस प्रकार हम किसी भौरे पे रस्सी लपेटते हैं ठीक उसी तरह इन आर्मेचरों पर रस्सी लपेटी। उसके बाद उन्हें बेकिंग के लिए भेजा गया। इसकी वजह से यह प्रक्रिया किसी मानवीय हस्तक्षेप के बिना स्वचालित बन गई। आगे चल कर जैसे हम और परीक्षण करते गए वैसे हम इस रस्सी का व्यास 0.3 मिमी. तक घटाते गए।
 
इसमें मटीरीयल की बचत होने लगी। इसकी वजह से आवर्तन काल भी अपनेआप कम हो गया। एक शिफ्ट में 1000 आर्मेचर तैयार करने की इस प्रक्रिया में एक आर्मेचर के कोटिंग को लगने वाला समय 30 सेकंडों से 18 सेकंड तक यानि 40% कम हो गया, तथा कोटिंग मटीरीयल का इस्तेमाल, औसत 5.5 ग्राम/आर्मेचर से कम होकर 3 ग्राम प्रति आर्मेचर तक यानि 45% घट गया।

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प्रसन्न अक्कलकोटकरजी यांत्रिकी अभियंता हैं। आप ‘फैबेक्स इंजीनीयर्स’ के संचालक हैं और आप को स्वचालन क्षेत्र का 25 सालों से अधिक अनुभव है।
 
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