इंडेक्सिंग की विभिन्न रचनाएं

15 Sep 2020 15:47:00

'धातुकार्य' अगस्त 2020 में प्रकाशित लेख में हमने जाना कि इंडेक्सिंग प्रकार के ड्रिल जिग किस तरह काम करते हैं। इस प्रकार के जिग की विशेषताएं आगे दी गई हैं।

⦁ कार्यवस्तु पर किए जाने वाले सारे छिद्र एक ही सेटिंग में (वस्तु बिना ड़ाले-निकाले) करने से छिद्र में अचूक परस्परसंबंध मिलता है।
⦁ जो परस्परसंबंध कार्यवस्तु पर बने छिद्रों में होता है वही (परस्परसंबंध) इंडेक्स प्लेट पर बने छिद्रों में रखना जरूरी है। इस प्रकार के जिग का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में उत्पादन करते समय तथा बड़े आकार की कार्यवस्तुओं के लिए भी किया जाता है। जैसे कि क्लच हाउसिंग, डिफरन्शियल हाउसिंग, फ्लाइ वील आदि।

कार्यवस्तु बहुत बड़ी और भारी हो तब स्वचालन का उपयोग जरूरी होता है। फिक्श्चर के इंडेक्सिंग और इंडेक्स पिन के संचलन हेतु स्वचालन का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे फिक्श्चर में संचलन का अनुक्रम निश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण होता है।

प्रायः इंडेक्स पिन तथा उसके हिस्से जिग के अचल (फिक्स्ड्) भाग पर बिठाए होते हैं। यह पिन, संचलित इंडेक्स प्लेट पर बने छिद्र या खांचे में बैठती है।

इंडेक्सिंग के विभिन्न प्रकार तथा रचनाएं
पिछले अंक में हमने जिस इंडेक्सिंग फिक्श्चर की जानकारी ली उसकी संकल्पना चित्र क्र. 1 में दर्शाई है।

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स्प्रिंग भारित इंडेक्स पिन


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चित्र क्र. 1 में दर्शाई इंडेक्स पिन हाथ से पीछे खींची जाती है। उसके बाद इंडेक्स प्लेट घुमाई जाती है। इंडेक्स प्लेट थोड़ी घुमा कर छोड़ दी तो पिन का अगला हिस्सा प्लेट के पिछले पृष्ठ पर सटता है। इससे कर्मचारी को पिन पीछे खींच कर पकड़ कर रखने की जरूरत नहीं होती। इंडेक्स प्लेट घुमाने पर जब अगला छिद्र इंडेक्स पिन के सामने आता है तब पिन, स्प्रिंग के बल से अपनेआप इंडेक्स प्लेट पर बने छिद्र में जाती है। इंडेक्स पिन तथा बुश को दिए चैंफर का भी उपयोग होता है। पिन, इंडेक्स प्लेट पर बने छिद्र में जाने के लिए कर्मचारी को कोई अलग प्रयास नहीं करना पड़ता, केवल स्प्रिंग के उपयोग से ही यह काम हो जाता है।

सरकती इंडेक्स पिन



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चित्र क्र. 2 में दर्शाए आरेखन में स्प्रिंग का इस्तेमाल नहीं किया है। इसलिए इंडेक्स प्लेट पर बने छिद्र में पिन बिठानी हो तब कर्मचारी को विशेष सावधानी बरतनी होती है। इंडेक्स पिन का डाइमंड आकार वाला हिस्सा निश्चित स्थिति में रहने हेतु पिन पर विशेष खांचा दिया होता है। इस खांचे में एक खास डॉग पॉइंट स्क्रू बिठाया जाता है।

बॉल टाइप इंडेक्सिंग

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चित्र क्र. 3 में दर्शाए आरेखन में स्प्रिंग के बल से काम करने वाला बॉल दिखाया गया है। इंडेक्स प्लेट पर त्रिकोणीय आकार के छोटे गड्ढे (कोनिकल डिंपल) बनाए गए हैं। इंडेक्स प्लेट घुमाने से बॉल पर दबाव पड़ता है। प्लेट पर बनाए अगले गड्ढे के सामने बॉल आने पर वह फिरसे गड्ढे में बैठता है और इंडेक्सिंग कार्य पूरा होता है। बॉल ना हिले या निकले इसलिए रिटेनिंग प्लेट बिठाई जाती है। जो अनुभव किसी चौपहिया गाड़ी में गियर बदलते समय आता है वैसा ही इंडेक्सिंग में महसूस होता है। इस प्रकार का इंडेक्सिंग छोटी कार्यवस्तु के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यंत्रण बल अधिक होने पर बॉल नीचे दबता है, इससे अपेक्षित यंत्रण नहीं होता। इस प्रणाली की लागत कम होती है तथा इसका निर्माण एवं इस्तेमाल आसान होता है।

रैक और पिनियन टाइप इंडेक्सिंग

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चित्र क्र. 4 अ में दर्शाए गए पिनियन से रैक (पिन) उपर नीचे होती है। इंडेक्स प्लेट आड़ी हो या खड़ी, दोनो ही स्थितियों में इस प्रकार के इंडेक्सिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। खास कर के बड़ी कार्यवस्तुओं के मामले में इसका उपयोग किया जाता है। लीवर ऊपर नीचे करने से पिन ऊपर नीचे होती है। कई बार पिन स्वचालन द्वारा ऊपर नीचे की जाती है। चूंकि रैक तथा पिनियन इन दोनो हिस्सों को केस हार्डनिंग तथा ग्राइंडिंग करना पड़ता है, उनकी लागत भी अधिक होती है। लेकिन इंडेक्सिंग पिन मुश्किल जगह पर हो तो इस प्रकार के डिजाइन का उपयोग होता है। लीवर की लंबाई अधिक होने से रैक आसानी से कार्यान्वित होता है। रैक, पिनियन तथा बुश को कठोर करें। चित्र क्र. 4 ब में दर्शाएनुसार बुश बिठाने पर, रैक ऊपर आते समय बुश ऊपरी तरफ धकेला जाता है तथा निकल आने का ड़र होता है। इसलिए इस प्रकार बुश ना बिठाएं।


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चित्र क्र. 4 क में रैक का उपरी हिस्सा शंक्वाकार (टेपर) किया है, वैसे ही कॉलर बुश भी शंक्वाकार किया है। इस प्रकार टेपर देना आवश्यक होता है क्योंकि सीधी बेलनाकार पिन, बार बार इस्तेमाल से घिसती है जिससे पूरा रैक बदलना पड़ता है। रैक बदलना महंगा होता है और इसमें समय भी काफी लगता है। टेपर रैक देने पर, जैसे पिन या बुश का व्यास छोटा अथवा बड़ा होता है, वैसे पिन आगे आगे जाती है। इससे पिन और बुश की आयु बढ़ती है।

इंडेक्सिंग प्लेट में बिठाई इंडेक्स पिन

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चित्र क्र. 5 अ में इंडेक्स पिन, इंडेक्सिंग प्लेट में यानि संचलन करने वाली प्लेट में बिठाई गई है। अब तक इंडेक्स पिन फिक्स प्लेट में बिठाई गई थी। इंडेक्स प्लेट पर एक ही छिद्र होता है। कार्यवस्तु पर जितने छिद्र होते हैं उतने ही फिक्स प्लेट पर करने होते हैं। चित्र क्र. 5 ब में टेपर पिन दर्शाई गई है।

अब तक हमने इंडेक्स प्लेट को लंबरूप स्थिति में यानि निचली या पीछे की ओर से बिठाई इंडेक्स पिन देखी हैं। इंडेक्स प्लेट के केंद्र की दिशा में आगे पीछे होने वाली इंडेक्स पिन की जानकारी आगे दी हैं।

केंद्र की दिशा में आगे पीछे होने वाली इंडेक्स पिन

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चित्र क्र. 6 अ में दर्शाई गई इंडेक्स पिन का अगला हिस्सा समानांतर खांचे में लोकेट होता है। कुछ समय बाद यह खांचा घिस कर फूलता है, जिससे यह पिन बदलनी पड़ती है। ऊपर दिया गया उपाय इसका हल हो सकता है। पिन का अगला हिस्सा टेपर करने से इसे लंबे समय तक इस्तेमाल कर सकते हैं। पिन या टेपर स्लॉट घिसने पर भी पिन आगे जाती रहती है (चित्र क्र. 6 ब) और इंडेक्सिंग अचूक होता है।

अब हम एक बहुत ही आसान और सरल रैचेट टाइप इंडेक्सिंग के बारे में जानते हैं। चित्र क्र. 7 में आप देख सकते हैं कि इंडेक्सिंग एक ही दिशा में हो रहा है। वह विपरित दिशा में नहीं होगा। चित्र क्र. 7 में स्प्रिंग के बल पर काम करने वाली इंडेक्सिंग पिन (प्लंजर) दिख रही है। इंडेक्स प्लेट पर विशेष खांचे बनाए गए हैं। खांचे का एक हिस्सा सीधा लंबरूप है तथा दूसरा पृष्ठ टेपर है।

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1. टेपर के कारण कार्यवस्तु केवल एक ही दिशा में यानि घड़ी की उल्टी दिशा में ही घूम सकती है। चित्र में घूमती दिशा दर्शाई गई है।
2. जैसे जैसे प्लंजर घिसता है, वैसे वैसे वो आगे बढ़ता है। इससे घिसाव का विपरित असर इंडेक्सिंग की अचूकता पर नहीं होता।
जब यंत्रण बल कम हो, तब इस प्रणाली का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें कर्मचारी को केवल कार्यवस्तु या इंडेक्स प्लेट घुमाने का काम करना है। इसके रखरखाव का खर्चा ना के बराबर होता है तथा दृश्यता बेहतर होती है। कार्यवस्तु पर जितने छिद्र बने हैं उतने खांचे इंडेक्स प्लेट पर बनाने पड़ते हैं।
ऐसी कई तरह की इंडेक्सिंग प्रणालियां उपयोग में लाई जा सकती हैं।

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